देश में सबसे ज्यादा सैनिकों वाला गांव, जहां हर चौखट पर नाम पते के आगे एक रैंक लिखी है
गांव का बुलाकीदास मठिया मैदान जहां दौड़ने से सेना में सिलेक्शन होना तय माना जाता है
गांव की सरहद संभाले बैठी मां कमच्छा से गांव की माएं मन्नत में ये मांगती है कि अगली भर्ती में मेरे बेटे का सिलेक्शन हो जाए
उपमिता वाजपेयी, गाजीपुर।
पूर्वांचल के गाजीपुर का गहमर एशिया का सबसे बड़ा गांव है। लेकिन इसकी उससे भी मजबूत, शौर्य से गूंथी पहचान ये है कि गहमर देश में सबसे ज्यादा सैनिकों वाला गांव है। वो गांव जहां हर परिवार में कम से कम एक सैनिक है। हर युवा ने कभी न कभी किसी भर्ती दौड़ में भाग लिया है। हर चौखट पर लगे नाम पते के आगे एक रैंक लिखी है, सूबेदार, कैप्टन,मेजर…। घर की दीवारें और तिजौरी गहनों की तरह मेडल और यूनिफॉर्म सहेजे हैं। गांव के ठीक बीचों बीच बना है विश्व युद्ध की याद में शहीद स्तंभ।
गांव की चौपाल पर बैठे लोगों से बात की तो मालूम हुआ वहां गप्प मारने बैठे 7 बुजुर्गों में से 5 की पेंशन या तो आर्मी या सीआरपीएफ से आती है। वहां देशभक्ति की जो दीवानगी पसरी थी उसकी जड़ों में दो कहानी मशहूर हैं। पहली ये कि अंग्रेजों के समय में यहां एक कप्तान रामस्वरूप सिंह होते थे। अंग्रेजी सेना गहमर गांव को उड़ाने आई। लेकिन रामस्वरूप सिंह को वर्दी और तमगा पहने देख लौट गई। वहीं दूसरी कहानी ये है इसी गांव के सूबेदार मेजर सीताराम सिंह ने रूडकी में अंग्रेजों को गार्ड ऑफ ऑनर देते समय दो राइफल तोड़ दी थी। उनके शौर्य की कहानियां सुन-सुनकर ही गहमरियों की सेना-पैरामिलिट्री में जाने की परंपरा शुरु हुई।
यहां की माएं बेटों को सरहद जाने से मना नहीं करतीं। गांव की सरहद संभाले बैठी मां कमच्छा से वो मन्नत में ये मांगती है कि अगली भर्ती में मेरे बेटे का सिलेक्शन हो जाए। वो गर्व से दोहराती हैं, मेरे तीनों बेटे फौज में हैं। यहां ऐसे भी परिवार हैं जिनके दादा 1971 की लड़ाई में, पिता करगिल और भाई कश्मीर में आतंकवादियों से लड़ते बलिदान हुए।
गहमर पर हुए बीएचयू के एक रिसर्च के मुताबिक जवान से लेकर जनरल तक इस गांव के लगभग 12 हजार लोग मौजूदा वक्त में सेना में हैं। और 15000 से ज्यादा पूर्व सैनिक हैं जो इसी गांव से हैं। दूसरे विश्व युद्ध में यहां से 228 जवान सेना में भर्ती हुए थे और उनमें से 21 को वीरता पदक मिले थे।
गांव में गंगा किनारे बुलाकीदास मठिया मैदान है। जहां हर सुबह शाम कई सौ बच्चे दौड़ लगाने आते हैं। माना जाता है कि जो बच्चा यहां दौड़ता है उसका सिलेक्शन तय है। मान्यता एक और भी है। इस मैदान के एक छोर पर बुलाकीदास का मंदिर है। ये देवता सेना में सिलेक्शन करवाने वाले देवता माने जाते हैं। इनकी देहरी पर एक लटकने वाली चौखट बनी है। दौड़ के लिए आए लड़के-लड़कियां यहां तीन बार लटकते हैं, क्योंकि ये प्रणाम करने का तरीका भी है और टोटका भी।
इस गांव की सबसे सुदंर तस्वीर यही परंपरा, भरोसा और पूजा है जो दौड़कर देश के खातिर पूरी की जाती है। जो पीढ़ी दर पीढ़ी शौर्य, साहस और वीरता के हवाले साथ संभाली जाती है। जिसकी बदौलत गहमर सैनिकों वाला गांव कहलाता है।
#Ghazipur #Gahmar @AdminGhazipur @CommissionerVNS @IgRangeVaranasi